हिंदु संस्कृती और सामाजिक शांती

5000 साल पेहले के प्राचीन वेदो मे जो शांती का तत्वज्ञान है,
वही 2000 साल पेहले के बायबल मे पाये गये,
वही 1400 साल पेहले के कुरान मे पाये गये.

लेकिन दुसरे धर्म के प्रती द्वेश और धर्मांतर कि कल्पना सिर्फ बायबल और कुरान मे क्यो है?

हिंदु संस्कृती शांतता का पुरस्कार करती है, साथ मे अन्याय का विरोध करना सिखाती है.

कभी आपने देखा या सुना है ,
कोई हिंदु "हर हर महादेव" का जप करते हुए निहत्तो पे गोलिया चलाने लगा और विस्फोट कर दिये?

पुरे विश्व मे जहा अशांती है, वहा कौनसे धर्म के लोग ज्यादा है?

हिंदु संस्कृती सिर्फ मुर्ती पुजा पाठ नही है. हिंदु संस्कृती तत्वज्ञान और विचारधारा है, कोई भी कल्पना विचार प्रतिमा वस्तु जिवित या मृत व्यक्ती पुज्य हो सकते है.

हिंदुत्व के अनुसार देव-देवता निसर्ग के प्रतिनिधी है, ये हमारी मानसिक शक्तिया है. और धर्म इस तत्वज्ञान क संघटन है.

सच्चा धर्म चमत्कार नही करता, सच्चा धर्म अपने भक्त को इतना मजबुत बनाता है कि अपने मेहनत पे वो सबकुछ कर सकता है.

आप हिंदु बाबा बापु मा पे हसते हो, अंधश्रद्धा का मजाक उडाते हो. लेकीन ये तो धर्म के व्यापारी बन चुके है, जो धर्म का गलत फायदा उठा रहे है.

कोई धर्म चमत्कार के काबिल नही है, कोई बाबा मौलवी पाद्री चमत्कारी नही है,
अगर कोई भी धर्म के नाम पे चंदा मांगके धंदा करे तो सावध रहिये.

अगर आप विश्वास करते हो तो धर्म रक्षा और मार्गदर्शन के लिये गुरुदक्षिणा दिजीये.
धर्म कोइ बाजार नही जहा आप इंवेस्ट करो और चमत्कार के इंटरेस्ट पे आप को मुनाफा हो जाये.

भारतीय उपखंड मे बसी हुई संस्कृती को 800 साल के इस्लामिक और 200 साल के युरोपिअन आक्रमकोने धर्मांतर और लुट के जरीये नष्ट करने का प्रयास किया, लेकिन सहिष्णु हिंदु संस्कृती सब सेहती रही. आज भी जो धर्म के नाम पे झगड रहे है, उ न्हे बता दु कि हमारे पुर्वज 2000 साल पेहले से हिंदु संस्कृती के वारस थे.

इसिलिये मे आज भी सबको एक धर्मीय मानता हु. धार्मिक अत्याचार के वजह से दुसरे धर्म को स्वीकार करनेवाले आज भी खुद को हिंदु मान सकते है. आप कुराण बायबल या कोई भी ग्रंथ पढो, लेकिन आप दुसरे विचारधारा का आदर करते हो , तो आप फिर भी हिंदु हो.

अगर आप सिर्फ हिंदु संस्कृती का द्वेश करते हो, तो जरुर आपके ग्रंथ मे जो द्वेश का आदेश दिया है उसी का आप पालन कर रहे हो.

आपके ईश्वर आप को आपके मुक्काम तर जरुर और जल्दहि पहुचाये, ये हमारी प्रार्थना है.

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